यादें, संस्मरण और VCR - (Mere Alfaz) written by Alok Pandey

कल रात बहुत दिनों बाद, अजय देवगन साहब का विजय पथ देख रहा था


एकाएक 

बचपन सामने आके खड़ा हो गया 

मुस्कुराते हुए बोला ..

याद है पगले कुछ या भूल गया 

मैंने कहा कैसे भूल सकता हूँ..


उन दिनों नया नया VCR आने का चलन शुरू हुआ था, गांव में.

विजय पथ उस VCR पे चलने वाली 

हमारी पसंदीदा फ़िल्मो में से एक थी .


आह क्या रोमांच था फिल्मों का 

वी सी आर का ..


पुरे गांव में एक कोई बड़ा सा खुला मैदान चुना जाता था .

और वहां रखा जाता था ..

वो सपनों का राजा ...


वी सी आर 


दिलवाले

लोहा 

फूल और कांटे

सीता और गीता

फ़रिश्ते

जानी दुश्मन 

पुलिस वाला गुंडा 

राजा हिंदुस्तानी

तिरंगा

मर्द

आँखें...


यही कुछ इक्का दुक्का याद हैं

मिथुन दा की बहुत सारी फिल्में जिनकी लिस्ट नही है 


हम रात को खाना खाना खा कर 

मैं और मेरे भइया अपना बोरिया बिस्तर समेट कर 

VCR वाली जगह पहुंच जाते थे.


देखते थे कि सबसे सही कहाँ से दिखेगा ,

वही अपना डेरा डाल देते थे .

भाई साहब भयंकर सर्दी में हम रात भर 

खुले मैदान में,गलियारे में ,यहां वहां, कहीं भी बैठे रहते थे।

देखते देखते कब नींद आ जाती थी ,पता ही नही लगता था  .

सुबह जब आंख खुलती थी तो हम अंग्रेजी के आठ बन चुके होते थे ठंड के मारे 😊.

लेकिन मज़ाल की सूरज बाबा के निकलने से पहले हम घर चले जाते...😊


जो वीसीआर करवाता था ..उस दिन वो अपने आप को किसी DM से कम नही समझता था.

ग़ज़ब का एटीट्यूड होता था उसमें

ऐसा लगता था उस दिन की जैसे उस vcr की खोज उसने ही कि हो 😁.


सभी अपने अपने हिसाब से अपनी एक फ़िल्मों की लिस्ट दे देते थे..लेकिन चलती उसी की थी जिसके यहाँ होता था ..

VCR 😊


वीसीआर जिस दिन गांव मे आता था 

मतलब ऐसा लगता था कि दीवाली हो उस दिन ..

मोहल्ले के सारे बच्चे आपस मे बहुत खुश होते 

उस दिन वो बिल्कुल आपस मे झगड़ा नही करते 

इतना प्यार सदियों में एक बार होता शायद उनमे और वो तभी होता जब vcr आता......


सुबह होती 

और हम सब तैयार होके स्कूल जाते 

और फिर मास्टर साहब की सन्टी से जब हमारी मार पड़ती तो हाथ और पीठ लाल हो जाती😢😊😂🤔

फिर न हमको फूल और कांटे याद रहती और न कोई फ़रिश्ते फ़िल्म का फ़रिश्ता हमको बचाने आता 😊 VCR  का सारा भूत उतर जाता और 

इतिहास

भूगोल 

रटना शुरू हो जाता😊


समय कैसे 4G की तरह भाग रहा है यार 

ऐसा लगता है कल की ही बात हो 🤔


- आलोक पाण्डेय